Monday, October 11, 2021


Itna pukara tujhko ki meri sans ful gyi 
Barsat huyi nhi aur meri tasveer dhul gyi 
Chad bate hi to huyi h darmiyan hamare
Itni jldi kya thi jo Tu bat krna bhul gyi 

Wednesday, September 8, 2021

 मौसम इस कदर बदल जायेंगा सोचा न था 

भरी धुप में बादल बरस जायेंगा सोचा न था 

और इस कदर रूठ गया ओ हमसे इतने दिन 

मेरे भी कुछ ख्वाब अधूरे रह जायेंगे  सोचा न था |

Love

घुटन सी हो रही थी उसे फिर भी मैं पास जा रहा था

मैं खुद ही रूठ गया पर उसे मनाए जा रहा था 

छोटा सा जख्म नासूर बन गया मेरे लिए 

ओ मेरे संसार से तंग आ गया थे और मैं जिए जा रहा था  |

Tuesday, July 27, 2021

लो कर लेते हम ही पहल , कि ये सब हुआ क्यों है 
ये रिश्ता जरा सी जिद की खातिर बदनुमा क्यों है
यूं तो रोज सवाल उठते है मेरे अल्हड़ और वफाई पर 
अब ये बताना पड़ेगा मुझे कि तुझसे प्यार क्यों हैं ।

Thursday, July 22, 2021

खुले आसमान में यार मेरा आगमन कर रहा है 
आते आते थोड़ा वो चिंतन मनन कर रहा है 
किस किस से तुम दोष छुपाओंगे अपने 
तुमको सब बताने का मन कर रहा है ।
और नदी के शान्त तट पर बैठकर मन
तेरी यादें विसर्जन कर रहा है ।


मेरी तरह मुझे चाहे तू ऐसा मेरा मन होता है 
अपने यार से बात छुपाने से क्या प्यार काम होता हैं
और लाख छुपाओ तुम अपनी गलतियां
प्रिए अपना मन भी एक दर्पण होता है 

Wednesday, July 7, 2021

प्रेरणादायक दंड

 छु   कर   मेरे   मन   को।

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प्रेरणादायक दंड


*अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।* 


*जज* ने जुर्म सुना और *लड़के* से पूछा,


 *"तुमने क्या सचमुच ब्रैड और पनीर का पैकेट" चुराया था ?*


लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया। ;- हाँ'।

जज,:- 'क्यों ?'

लड़का,:- मुझे ज़रूरत थी।

जज:- 'खरीद लेते।

लड़का:- 'पैसे नहीं थे।'

जज:- घर वालों से ले लेते।'

लड़का:- 'घर में सिर्फ मां है।

बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी

जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?

लड़का:- करता था एक कार वाशिंग प्वाइंट में।

मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।'

जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?

लड़का:- सुबह से घर से निकला था, तकरीबन पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।


जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और पनीर ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है । और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं। 'अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ सहित सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा।'


ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले किया।

अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।'

जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी तलब करती है।


फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।


क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार है ?


चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए ।

Saturday, March 6, 2021

 सुरुवात में दो अनजाने मिलते है 

बाते होती है, ऐतबार होता है, फिर प्यार होता है 

या तो धोखा या चाहत या न मिलने के पीछे परिवार होता है 

कहानी सब एक जैसी बस..... अलग किरदार होता है 



 प्यार का  एहसास न बहुत प्यारा होता एक दूसरे से expectation भी बहुत होती है । मेरा व्यवहार उसके लिए सबसे अलग था मुझे ये लगा था कि मैं जैसा ह...